बार-बार शुरू करके बीच में छूट जाता है? यह 141 पन्नों की जर्नल हर सुबह आपको एक साफ़ पन्ना देती है: पाठ करें, डिब्बे पर निशान लगाएँ, एक पंक्ति लिखें। बस इतना।
इसका हल ज़्यादा भक्ति नहीं। एक साफ़ ढाँचा है।
जर्नल की माला ऐसे ही भरती है। मनकों को छूकर देखिए।
हर 12 दिन एक नया भाव, एक नई चौपाई, नए सुझाव। इसलिए पन्ने दोहराव नहीं लगते।
पाठ का डिब्बा, छोटा अभ्यास, चिंतन-प्रश्न, प्रार्थना, आभार और प्रगति-पट्टी। रोज़ एक साफ़ पन्ना।
नाम, तिथि, भावना, रोज़ का नियम और पड़ाव की तिथियाँ।
पूरे 52 सप्ताह का अलग ट्रैकर।
8 सदस्यों तक, हर एक के 108 मनके।
छापकर काटें या स्क्रीन पर पढ़ें।
छपने योग्य, पूरा पाठ एक ही जगह।
108 दिन पूरे होने की सुंदर स्मृति।
सुरक्षित भुगतान · खरीद के बाद PDF ईमेल पर
A5 आकार की PDF। फ़ोन या टैबलेट पर पढ़ें, या प्रिंट करके पेन से भरें।
कोई बात नहीं। जर्नल में लिखा है: स्वयं को दोष न दें, अगले दिन प्रेम से लौटें। छूटा दिन खाली छोड़ें या अंत में जोड़ लें।
हाँ। अंत में मिनी चालीसा है (गोस्वामी तुलसीदास कृत)। पाठभेद संभव हैं, इसलिए अपनी परंपरा के संस्करण से मिला लें।
नहीं। यह भक्ति, निरंतरता और आत्म-चिंतन का सहारा है। सभी सुझाव वैकल्पिक हैं।
यह व्यक्तिगत भक्ति-उपयोग के लिए है। परिवार ट्रैकर में परिवार को साथ जोड़ें, पर फ़ाइल बेचें या आगे वितरित न करें।
कल की प्रतीक्षा क्यों? आज ही पहला मनका भरिए।